
Thursday, 26 August 2010
मुहावरा ग़ज़लजिस किसी दिन तुम उसूलो के कड़े हो जाओगेबस उसी दिन अपने पैरों पर खड़े हो जाओगेमैं महाज़े जिंदगी पर सुर्खरू हो जाऊंगातुम अगर मेरे बराबर में खड़े हो जाओगेजिस की गीबत कर रहे हो तुम सभी सर जोड़करआया तो ताज़ीम में उठकर खड़े हो जाओगेकोई गैरतमंद मुहसिन खुद ब खुद मर जायेगासामने उसके जो तुम तन कर खड़े हो जाओगेवो जहाँ दीदा था उसने इल्म यूँ आधा दियाजानता था तुम बराबर से खड़े हो जाओगेसब यहाँ अहले नजर हैं क्या गलत है क्या सहीखुद को मैं छोटा कहूँ तो तुम बड़े हो जाओगे ?मसनदे इंसाफ पर क्या दोस्ती क्या दुश्मनीतुम खफा मुझ से अगर होगे पड़े हो जाओगेबात मेरी गाँठ में तुम बाँध लो इस दौर मेंकाम तब होगा के जब सर पर खड़े हो जाओगेअहले तिलहर के लिए बच्चे ही हो आदिल रशीदतुम ज़माने के लिए बेशक बड़े हो जाओगे आदिल रशीद शब्दार्थ:महाज़े ज़िंदगी, जीवन युद्ध सुर्ख़रू, कामयाब,विजयी ग़ीबत, निंदा ताज़ीम, सम्मान गैरतमंद, स्वाभिमानीमुहसिन, अहसान,उपकार करने वालाजहाँ दीदा, दुनिया देखे हुए इल्म, ज्ञान अहले नज़र, पारखी,मसनदे इंसाफ, न्याय सिंहासन अहले तिलहर, तिलहर के लोग

Wednesday, 11 August 2010
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