Friday, 26 April 2024

ग़ज़ल : आज का बीते कल से क्या रिश्ता झोंपड़ी का महल से क्या रिश्ता

आज का बीते कल से क्या रिश्ता 
झोंपड़ी का महल से क्या रिश्ता 

हाथ कटवा लिए महाजन से 
अब किसानों का हल से क्या रिश्ता 

सब ये कहते हैं भूल जाओ उसे 
मशवरों का अमल से क्या रिश्ता 

किसकी ख़ातिर गँवा दिया किस को
अब मेरा गंगाजल से क्या रिश्ता 

ज़िंदा रहता है सिर्फ पानी में 
रेत का है कँवल से क्या रिश्ता 

जो गुज़रती है बस वो कहता हूं 
वरना मेरा ग़ज़ल से क्या रिश्ता 

जिसमें सदियों की शादमानी हो
अब किसी ऐसे पल से क्या रिश्ता 

मैं तो हामी हूं अम्न का आदिल 
मेरा जंगो जदल से क्या रिश्ता 
आदिल रशीद 

آج کا بیتے کل سے کیا رستہ
جھونپڑی کا محل سے کیا

ہاتھ کٹوا لۓ مہاجن سے
اب کسانوں کا ہل سے کیا رستہ 

سب یہ کہتے ہیں بھول جاؤ اسے
 مشوروں کا عمل سےکیا رستہ

کس کی خاطر گنوا دیا کس کو 
اب مرا گنگا جل سے کیا رستہ 

ژندہ رہتا ہے صرف پانی میں 
ریت کا ہے کنول سے کیا رستہ

جو گزرتی ہے بس وہ کہتا ہوں
ورنہ میرا غزل سے کیا رستہ

جس میں صدیوں کی شادمانی ہو
اب کسی ایسے پل سے کیا رستہ 

میں تو حامی ہوں امن کا عادل
میرا جنگ و جدل سے کیا رستہ 
عادل رشید 
9810004373
9811444626









Wednesday, 27 June 2012

wafa ka lafz to duniya ki har zaban me tha samajh me aaya hai abbas ke hawale se....aadil rasheed

wafa ka lafz to duniya ki har zaban me tha
samajh me aaya hai abbas ke hawale se....aadil rasheed

Tuesday, 8 November 2011

aadil rasheed hindi/urdu blog आदिल रशीद हिंदी/ उर्दू ब्लॉग

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Thursday, 26 August 2010

मुहावरा ग़ज़लजिस किसी दिन तुम उसूलो के कड़े हो जाओगेबस उसी दिन अपने पैरों पर खड़े हो जाओगेमैं महाज़े जिंदगी पर सुर्खरू हो जाऊंगातुम अगर मेरे बराबर में खड़े हो जाओगेजिस की गीबत कर रहे हो तुम सभी सर जोड़करआया तो ताज़ीम में उठकर खड़े हो जाओगेकोई गैरतमंद मुहसिन खुद ब खुद मर जायेगासामने उसके जो तुम तन कर खड़े हो जाओगेवो जहाँ दीदा था उसने इल्म यूँ आधा दियाजानता था तुम बराबर से खड़े हो जाओगेसब यहाँ अहले नजर हैं क्या गलत है क्या सहीखुद को मैं छोटा कहूँ तो तुम बड़े हो जाओगे ?मसनदे इंसाफ पर क्या दोस्ती क्या दुश्मनीतुम खफा मुझ से अगर होगे पड़े हो जाओगेबात मेरी गाँठ में तुम बाँध लो इस दौर मेंकाम तब होगा के जब सर पर खड़े हो जाओगेअहले तिलहर के लिए बच्चे ही हो आदिल रशीदतुम ज़माने के लिए बेशक बड़े हो जाओगे आदिल रशीद शब्दार्थ:महाज़े ज़िंदगी, जीवन युद्ध सुर्ख़रू, कामयाब,विजयी ग़ीबत, निंदा ताज़ीम, सम्मान गैरतमंद, स्वाभिमानीमुहसिन, अहसान,उपकार करने वालाजहाँ दीदा, दुनिया देखे हुए इल्म, ज्ञान अहले नज़र, पारखी,मसनदे इंसाफ, न्याय सिंहासन अहले तिलहर, तिलहर के लोग